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Shree Krishan JIi ka Giraj Paravat , गिर्राज जी की अविश्वनीय कहानी

गिर्राज जी की अविश्वनीय कहानी 

Shree Krishan JIi ka Giraj Paravat
गोवेर्धन जी की रहस्यमय कहानी 


गोवर्धन पर्वत की कहानी बेहद रोचक है। यह वही पर्वत है जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी एक उंगली पर उठा लिया था और लोगों की रक्षा की थी।

गोवर्धन पर्वत उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के अंतर्गत एक नगर पंचायत है। गोवर्धन व इसके आसपास के क्षेत्र को ब्रज भूमि भी कहा जाता है।
यह भगवान श्री कृष्ण की लीलास्थली है। यहीं पर भगवान श्री कृष्ण ने द्वापर युग में ब्रजवासियों को इन्द्र के प्रकोप से बचाने के लिये गोवर्धन पर्वत अपनी कनिष्ठ अंगुली पर उठाया था। गोवर्धन पर्वत को भक्तजन गिरिराज जी भी कहते हैं।
सदियों से यहाँ दूर-दूर से भक्तजन गिरिराज जी की परिक्रमा करने आते रहे हैं। यह ७ कोस की परिक्रमा लगभग २१ किलोमीटर की है। मार्ग में पड़ने वाले प्रमुख स्थल आन्यौरगोविन्द कुंडपूंछरी का लोठाजतिपुरा राधाकुंडकुसुम सरोवरमानसी गंगादानघाटी इत्यादि हैं।

गिर्राज जी की अविश्वनीय कहानी
गिर्राज  जी 

पौराणिक मान्यता अनुसार ,

श्री गिर्राज  जी को पुलस्त्य ऋषि द्रौणाचल पर्वत से ब्रज में लाए थे। 
दूसरी मान्यता यह भी है कि जब रामसेतुबंध का कार्य चल रहा था तो हनुमानजी इस पर्वत को उत्तराखंड से ला रहे थे, लेकिन तभी देववाणी हुई की सेतुबंध का कार्य पूर्ण हो गया है, तो यह सुनकर हनुमानजी इस पर्वत को ब्रज में स्थापित कर दक्षिण की ओर पुन: लौट गए।

  माना जाता है कि 5000 साल पहले यह पर्वत 30 हजार मीटर ऊंचा हुआ करता था। अब इसकी ऊंचाई बहुत कम हो गई है। 
इसके रोज घटने के पीछे भी एक रोचक कहानी है। कहा जाता है कि पुलस्त्य ऋषि के शाप के कारण यह पर्वत एक मुट्ठी रोज कम होता जा रहा है।


Gowerdhan
Gowerdhan 

आखिर क्यों दिया था पुलस्त्य  ऋषि ने गिर्राज  पर्वत को रोज कम होने का शाप 
बेहद पुरानी मान्यता है कि गिर्राज जी की सुंदरता को देख पुलस्त्य ऋषि बेहद खुश हुए। उन्होंने इन्हें द्रोणांचल पर्वत से उठाया और अपने यहां ले जाने लगे। उठाने से पहले गिर्राज जी ने कहा था "कि आप मुझे जहां भी पहली बार रखेंगे मैं वहीं स्थापित हो जाउंगा।" रास्ते में साधना के लिए ऋषि ने पर्वत को नीचे रख दिया। ऋषि की लाख कोशिशों के बाद भी पर्वत हिला नहीं। इसके बाद गुस्से में ऋषि ने पर्वत को शाप दिया कि वह रोज कम होगा। माना जाता है कि उसी समय से गिरिराज जी वहां हैं और कम होते जा रहे हैं।


क्यों उठाया गोवर्धन पर्वत
इस पर्वत को भगवान कृष्ण ने अपनी एक उंगली से उठा लिया था। कारण यह था कि मथुरा, गोकुल, वृंदावन आदि के लोगों को वह घनघोर बारिश से बचाना चाहते थे। नगरवासियों ने इस पर्वत के नीचे इकठ्ठा होकर अपनी जान बचाई। यह बारिश इंद्र ने करावाई थी। लोग इंद्र से डरते थे और डर के मारे सभी इंद्र की पूजा करते थे, तभी कृष्ण ने कहा था कि आप डरना छोड़ दे...मैं हूं ना।


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